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8th cpc news : 45 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनर्स के लिए बड़ा अपडेट, आठवें वेतन आयोग में इस वजह से हो रही देरी

8th cpc news - आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का इंतजार सरकारी कर्मचारियों के लिए लंबा होता जा रहा है। सरकार को लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को उम्मीद थी कि सरकार जल्दी ही इसके गठन और सिफारिशों को लेकर घोषणा करेगी, लेकिन यह प्रक्रिया अब तक अटकती नजर आ रही है.आइए जानते है इसके बारे में विस्तार से.

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8th cpc news : 45 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनर्स के लिए बड़ा अपडेट, आठवें वेतन आयोग में इस वजह से हो रही देरी

MY Job Alarm : (Why 8th Pay Commission Delay) आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का इंतजार सरकारी कर्मचारियों के लिए लंबा होता जा रहा है। सरकार को लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को उम्मीद थी कि सरकार जल्दी ही इसके गठन और सिफारिशों को लेकर घोषणा करेगी, लेकिन यह प्रक्रिया अब तक अटकती नजर आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, आयोग की घोषणा में तीन प्रमुख वजहें हैं, जिनकी वजह से सारा मामला खिंचता चला जा रहा है।

अभी तक तैयार नहीं हुआ ToR-

वेतन आयोग की स्थापना में केवल घोषणा नहीं, बल्कि एक लंबी प्रक्रिया शामिल है। सरकार को इसके लिए अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति करनी होती है। साथ ही, आयोग के काम करने का दायरा (टर्म ऑफ रेफरेंस) भी तय करना होता है। चूंकि सरकार अभी तक इस कार्य-परिधि को अंतिम रूप नहीं दे पाई है, इसलिए आयोग का गठन और उसका काम शुरू नहीं हो सका है।

बजट पर बढ़ता बोझ-


सरकारी खर्च पर संभावित दबाव के कारण आठवें वेतन आयोग (8th pay commission latest updates) को अभी तक लागू नहीं किया गया है। 7वें वेतन आयोग ने सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ डाला था, और अब जब अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है, सरकार अपनी वित्तीय स्थिति को स्थिर रखने के लिए नए बड़े खर्चों से बच रही है। 8वें वेतन आयोग के लिए कोई ठोस बजटीय प्रावधान (budgetary provision) नहीं किया गया है, क्योंकि सरकार देश के राजकोषीय संतुलन को बनाए रखना चाहती है।


नया सैलरी स्ट्रक्चर अभी नहीं हुआ पूरी तरह से तैयार-

आयोग की मुख्य जिम्मेदारी है मौजूदा वेतन ढांचे का गहन अध्ययन करके एक नई संरचना बनाना। इसमें बेसिक पे, ग्रेड पे, भत्ते और पेंशन प्रणाली (pension system) में संशोधन करना शामिल है। सरकार ने कर्मचारियों (employees) और यूनियनों से सुझाव लेना शुरू कर दिया है। विभिन्न वर्गों और विभागों की मांगों को पूरा करते हुए एक ऐसा व्यावहारिक मॉडल तैयार करना, जो सरकारी खजाने पर ज्यादा बोझ न डाले, एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।


जैसे- जैसे साल 2025 खत्म हो रहा है, कर्मचारियों (employees) का धैर्य लगातार टूटता दिखाई दे रहा है। उन्हें भरोसा था कि यह आयोग समय रहते बन जाएगा और 2026 तक उनकी सैलरी स्ट्रक्चर (salary structure) में बदलाव लागू हो जाएगा। लेकिन मौजूदा हालात देखकर लगता है कि यह प्रक्रिया और लंबी खिंच सकती है।

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