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नई फसल आने तक बाजरे में अच्छी तेजी की उम्मीद


नई दिल्ली, 17 मार्च (एम बाजरे का उत्पादन पूर्व अनुमान से कम होने तथा 24 प्रतिशत खाद्यान्न एवं डिस्टलरी प्लांटों में अतिरिक्त खपत बढ़ने से बिक्री कम के बावजूद ऊंचे भाव चल रहे है तथा अगले महीने के अंत तक 100 रुपए की और तेजी लग रही है।

यद्यपि बाजरे की बिजाई इस बार यूपी हरियाणा राजस्थान तीनों ही राज्यों बढ़ने से उत्पादन अधिक रहा है, लेकिन फसल में दाना लगने के समय में मध्य एवं पूर्वी यूपी में बरसात होने से बाजरे की बाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था, जिसके चलते पूर्व उत्पादन अनुमान की तुलना में थोड़ी कमी आ गई है, लेकिन गत वर्ष की अपेक्षा उत्पादन अधिक ही रहा है। इस बार पुराना स्टॉक मंडियों में नहीं बचा था, जिससे कुल मिलाकर खपत के अनुरूप माल इस बार भी नहीं है। दूसरी ओर 24 प्रतिशत के करीब खाद्यान्न में बाजरे की खपत बढ़ गई है।

उधर डिस्टलरी प्लांट वाले भी लगातार बाजरे की खरीद कर रहे हैं, क्योंकि चावल किनकी बहुत महंगी बिक रही है। यही कारण है कि बाजरा इस समय बिक्री कम के बावजूद भी मौली बरवाला पहुंच में 2400/2410 रुपए प्रति कुंतल अकड़ बनाए हुए है तथा यूपी हरियाणा की मंडियों में 2190/2200 रुपए का व्यापार लूज में होने लगा है। गौरतलब है कि इस बार एलनीनो के प्रभाव से बरसात कम हुई है। यही कारण है कि बाजरे

की खड़ी फसल खेतों में बढ़िया थी, लेकिन बाद में मौसम प्रतिकूल होने से पूर्व अनुमान 160-165 लाख टन से घटकर 158-160 लाख टन के करीब रह गया है, जबकि गत वर्ष 138-140 लाख मीट्रिक टन के करीब हुआ था। बाजरे की पोल्ट्री एवं कैटल फीड की खपत लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा खाद्यान्न में भी अतिरिक्त खपत जारी है। अतिरिक्त खपत का कारण यह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय में बाजरे की खाद्यान्न में खपत से पौष्टिक आहार की पूर्ति होती है। इसके अलावा सीरिल्स में भी खपने लगा है।

उत्पादक मंडियों में आवक का दबाव पूरी तरह समाप्त हो चुका है तथा डिस्टलरी प्लांटों की लिवाली से अप्रैल-मई में बाजरे की खपत और बढ़ जाएगी। इस समय हरियाणा पंजाब के अलावा राजस्थान की मंडियों में भी मांग बनी हुई है तथा पंजाब में लगातार मांग चल रही है। अतः वर्तमान भाव में अगले एक डेढ़ माह के अंतराल 100 रुपए की तेजी लग रही है।

व्यापार अपने विवेक से करें।

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