IT Notice : आपकी इन 3 ट्रांजेक्शन पर इनकम टैक्स की है पैनी नजर, तुरंत मिलेगा नोटिस
My job alarm - (Financial transactions) पैसों के ट्रांजेक्शन के लिए आज कल कई विकल्प मौजूद है। आपने भी लगभग हर जरिए पैसों का लेन देन किया होगा। वर्तमान में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला साधन यूपीआई (UPI transactions) है। गूगल पे, फोन पे, पेटीएम आदि ऑनलाइन ट्राजेक्शन के सबसे प्रचलित जरिए बने हुए है। इन सब के बावजूद भी कैश और चेक पेमेंट करते हुए भी आपको काफी लोग देखने को मिलने वाले है। छोटी-मोटी ट्रांजेक्शन तक को ठीक है, लेकिन दिक्कत तब होती है जब बड़ी कैश ट्रांजेक्शन होने लगती हैं। क्या आपको पता है कि आपकी बड़ी ट्रांजेक्शन पर जरा सी भनक लगते ही इनकम टैक्स विभाग (IT Notice) के कान खड़े हो जाते हैं और ऐसे लोग आयकर विभाग के रडार पर आ जाते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 हाई वैल्यू कैश ट्रांजेक्शन के बारे में, जो करते ही आपको इनकम टैक्स का नोटिस (Income Tax Notice) आ सकता है।
आपके खाते में कितने पैसे जमा हैं और आपका ट्रांजैक्शन स्टेटस (transaction status) कैसा है, इस प्रकारी की सभी जानकारी बैंक आयकर विभाग यानी इनकम टैक्स ऑफिस के साथ शेयर करता है। लेकिन क्या आप ऐसे तीन ट्रांजैक्शंस के बारे में जानते हैं जिस पर आयकर विभाग की सीधी नजर रहती है। ऐसे ट्रांजैक्शन को इनकम टैक्स हमेशा गंभीरता से लेता (Income Tax Department) है। चलिए जानते हैं इससे जुड़ी जानकारी।
10 लाख से अधिक कैश जमा होने पर बैंक हो जाता है सतर्क
अगर आपको अपने बैंक खाते और उससे जुड़े नियमों के बारे में जानकारी नही है तो आप मुश्किल में भी फंस सकते है। इसलिए फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स (financial experts) ने अपनी राय देते हुए काफी जानकारी साझा की है। अगर किसी अकाउंट होल्डर के सेविंग बैंक खाते में 10 लाख से अधिक कैश डिपॉजिट हो और वो हर 3 महीन में सेविंग बैंक में बचत पर अच्छा इंटरेस्ट कमा लेता है तो आयकर विभाग ऐसी अकाउंट पर बारीकी से नजर रखता है। आयकर विभाग (income tax department) हमेशा इस बात का ख्याल रखता है कि संबंधित अकाउंट में आय के ऐसे कितने स्रोत हैं, जिनका ब्यौरा बैंक के पास नहीं है। बैंक के पास आपकी आय की जानकारी होना बेहद आवश्यक है।
10 लाख रुपये से ज्यादा की FD
बहुत से लोगों को बैंक और उससे जुड़े नियमों के बारे में ज्षदा कुछ पता ही नही होता है। अगर एक वित्त वर्ष में 10 लाख रुपये से ज्यादा का पमेंट ऑनलाइन या ऑफलाइन सेटल किया जाता है, तब भी बैंक इसकी जानकारी आय कर ऑफिस को देता है। साथ ही, अगर आपने एक ही अकाउंट नंबर पर वित्त वर्ष में 10 लाख रुपये से ज्यादा की एफडी (Fixed Deposit rules) खुलवाई है, तब भी बैंक इसकी जानकारी इनकम टैक्स विभाग को देता है। जानकारी के लिए बता दें कि बैंक फॉर्म 61A के तहत ये जानकारी इनकम टैक्स को देता है। 10 लाख रुपये से ज्यादा की एफडी पर आप जो इंटरेस्ट कमाते हैं, उस पर भी आयकर की नजर रहती है।
50 लाख से ज्यादा कैश डिपॉजिट
सेविंग खाते और करंट खाते के नियमों में काफी फर्क होता है। मान लो कि अगर किसी करंट अकाउंट में 50 लाख रुपये से ज्यादा राशि का कैश डिपॉजिट होता (cash deposit limit) है तब भी बैंक इस ट्राजैक्शन की जानकारी तुरंत ही आयकर विभाग को देता है। केवल इतना ही नही, क्रेडिट कार्ड के 1 लाख रुपये के बिल के कैश में सैटलमेंट (cash settlement) करने पर भी बैंक ये जानकारी आयकर विभाग के साथ शेयर करता है। तो कुल मिलाकर आपकी हर एक बड़ी पेमेंट की जानकारी बैंक के द्वारा आयकर विभाग को पहुंचाई जाती है।
