My job alarm

लोन नहीं भरने पर SBI को मुकदमा दर्ज कराना पड़ा भारी, दिल्ली कोर्ट ने मांगा जवाब

Court News : स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की कार्यप्रणाली को लेकर दिल्ली की एक कोर्ट में मामला आया। बैंक ने मृत व्यक्ति पर ही मुकदमा कर दिया। बैंक की ओर से प्रतिवादी के बारे में जानकारी ही नहीं ली गई कि वह जिंदा है या मर गया। कोर्ट ने नोटिस भेजकर बैंक शाखा महाप्रबंधक से पूछा है कि एक बड़ा व जिम्मेदार बैंक होने पर भी बिना जांच किए मृत व्यक्ति पर मुकदमा दायर करने का फैसला क्यों लिया गया? आइये जानते हैं इस बारे में पूरी डिटेल।

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लोन नहीं भरने पर SBI को मुकदमा दर्ज कराना पड़ा भारी, दिल्ली कोर्ट ने मांगा जवाब

My job alarm - (Delhi court decision) बैंकों से वित्तीय लेन-देन व लोन आदि के मामले डिस्प्यूट होने पर अक्सर कोर्ट तक भी पहुंच जाते हैं। ऐसा ही एक मामला दिल्ली की एक कोर्ट में पहुंचा है। इसमें एसबीआई की संचालन प्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। मामले के अनुसार बैंक ने लोन लेने वाले एक व्यक्ति पर मुकदमा दायर कर दिया और वह व्यक्ति दो साल पहले ही मर चुका था। ऐसे में कोर्ट तक यह मामला जाने पर कोर्ट ने एसबीआई (SBI)को नोटिस देकर पूछा कि ऐसा क्यों किया गया? मुकदमा दायर कराने से पहले क्यों नहीं चेक किया गया कि लोन लेना वाला उक्त व्यक्ति जिंदा है या मर गया। इस पर बैंक ने क्या जवाब दिया है, जानिये इस खबर में।

कोर्ट ने किया मुकदमा खारिज


भारतीय स्टेट बैंक (State bank of india) ने ऋण नहीं चुकाने वाले एक व्यक्ति पर वसूली का केस दर्ज कराया था। उक्त व्यक्ति की मौत हो चुकी थी। कोर्ट ने इस मुकदमे को खारिज तो किया ही, साथ ही अदालत ने कहा कि एसबीआई जैसे देश के बड़े बैंक से यह उम्मीद तो की ही जाती है कि किसी के खिलाफ मुकदमा दायर कराने से पहले कम से कम बैंक उस वयक्ति के जिंदा होने या न होने के बारे में तो जांच करेगा। 


इस मामले में बैंक ने ऐसा नहीं किया तो कोर्ट ने बैंक को नोटिस जारी कर यह पूछा है कि आखिर बैंक ने एक मृत व्यक्ति पर मुकदमा दायर करने का फैसला क्या सोचकर लिया है? यह सब दिल्ली की एक कोर्ट में प्रतिवादी सिया नंद के खिलाफ ऋण वसूली के लिए एसबीआई द्वारा दायर केस की सुनवाई के दौरान सामने आया है। बैंक ने सिया नंद से करीब साढ़े 13 लाख रुपये की वसूली ब्याज सहित किए जाने की बात कही थी।

बैंक को जांच करने के लिए कहा था


इस मामले में कोर्ट (Delhi court news) ने बैंक से प्रतिवादी के बारे में जांच करने को कहा था। बैंक ने जांच की तो पाया गया कि जिस व्यक्ति यानी सिया नंद पर मुकदमा दायर किया गया है, वह तो दो साल पहले मर चुका है। कोर्ट ने इस मामले में झूठा हलफनामा देने के लिए संबंधित शाखा प्रबंधक को नोटिस जारी किया और बैंक के कानून, वसूली और मुकदमा से जुड़े मामले देखने वाले महाप्रबंधक  को नोटिस भेजा और कोर्ट ने उनसे जवाब मांगा कि यह फैसला किस आधार पर लिया है।

SBI ने मानी अपनी गलती


इस मामले में जवाब देते हुए एसबीआई ने अपनी गलती मान ली है। कोर्ट ने इस बारे में स्पष्ट भी कर दिया है। अब बैंक ने अदालत को आश्वासन दिया है कि वह दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। अदालत ने कहा कि बैंक की मानक संचालन प्रक्रियाओं (standard operating procedures) में प्रतिवादी पर मुकदमा चलाने से पहले उसके मृत है या जीवित होने का पता लगाने का कोई प्रावधान दिखाई नहीं दे रहा है।

यह भी कहा है कोर्ट ने


एसबीआई ने अब इस मामले में कोर्ट का सुझाव माना है कि बैंक मुकदमा अधिकारी जन्म एवं मृत्यु के मुख्य रजिस्ट्रार से आंकड़े जुटाएंगे। इस पर कोर्ट ने शाखा प्रबंधक द्वारा मांगी गई माफी को ध्यान में रखते हुए जारी किए गए नोटिस को खारिज कर दिया। साथ ही यह भी कहा कि किसी बैंक से ये उम्मीद नहीं की जाती कि वह मृत व्यक्ति पर मुकदमा दायर कर जानकारी न होने का हवाला दे। बैठे-बैठे इस तरह की जानकारी मिलने का इंतजार करना बैंक की संचालन प्रणाली (bank operating system) पर सवाल है। अगर बैंक को जानकारी नहीं मिलती है तो वह मृत व्यक्ति पर मुकदमा करने के लिए सीधा कदम उठाए, यह तर्कसंगत नहीं लगता। देश के अग्रणी बैंक से यह कतई उम्मीद नहीं की जाती।

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