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क्या भारत की राजनैतिक पार्टियाँ इलेक्टोरल बॉण्ड का उठा रही थीं गलत फ़ायदा

क्या इलेक्टोरल बॉन्ड भारत की राजनीतिक पार्टियां गलत तरीके से कर रही थी क्या इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड को रद्द कर दिया है देखिए साल 2018 में वित्त मंत्री अरुण जेटली इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम लाए थे

जिस में कोई भी इंसान एसबीआई बैंक में 1000 रूपये से लेकर करोड़ो रुपए जमा करवाकर बॉन्ड इशू करवा सकता था और बॉन्ड को अपनी पसंदीदा पार्टी को गिफ्ट में दे सकता था इस से चंदा देने वाले का नाम अमाउंट सिक्रेट रखी जा सकती थी.

इस से पहले अगर किसी पार्टी को 20000 रूपये से ज्यादा फंडिंग मिलता था ना उस पार्टी को फंडिंग देने का नाम पब्लिक करना पड़ता था लेकिन इलेक्टोरल बॉन्ड आने के बाद ऐसा नही होता था यानी सूचना का अधिकार होने के बाबजूद भी जनता को ये पता भी नही लगता था कि भइया किस पार्टी को कितना पैसा डोनेट किया गया है .

पार्टी सता में आने के बाद कंपनी को क्या फायदा पहुंचा रही है ये भी नही पता लगता था इसी इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए पिछले साल बीजेपी को 719 करोड़ रुपए और काग्रेस को 80 करोड़ रुपए की फंडिंग मिली है लेकिन किस ने दी ये पता ही नही इसी समस्या को देखते हुए राइट टू इनफॉर्मेशन के तहत सुप्रीम कोर्ट ने इसइलेक्टोरल बॉन्ड को ही रद्द कर दिया है

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